ईरान-इजरायल युद्धविराम के बाद खामनेई का पहला बयान: शांति की अपील, लेकिन सतर्कता बरकरार
तेहरान। ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव और हालिया संघर्ष के बाद घोषित युद्धविराम के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामनेई का पहला आधिकारिक बयान सामने आया है। अपने संबोधन में खामनेई ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया, लेकिन साथ ही ईरानी जनता और सेना से सतर्क रहने की अपील की।
खामनेई ने कहा, “यह युद्धविराम केवल एक अस्थायी राहत है। हमें अपनी सीमाओं और आत्मनिर्भरता की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहना होगा। दुश्मन की नीयत पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।”
शांति की उम्मीद, लेकिन संघर्ष की चेतावनी
अपने बयान में खामनेई ने कहा कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन यदि देश की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती दी गई, तो ईरान उसका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने कहा कि इस युद्धविराम से यह सिद्ध होता है कि क्षेत्र में स्थायी समाधान केवल संवाद और न्याय पर आधारित प्रयासों से ही संभव है।
युद्धविराम की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि बीते कुछ हफ्तों से ईरान और इजरायल के बीच तनाव अपने चरम पर था। दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
युद्धविराम पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियों ने संतोष व्यक्त किया है। अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ ने दोनों देशों से संयम बरतने और स्थायी शांति वार्ता की ओर बढ़ने की अपील की है।
ईरानी जनता में मिला-जुला असर
खामनेई के बयान के बाद देश में मिलेजुले भाव नजर आए। कुछ लोगों ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए शांति की उम्मीद जताई, वहीं कई वर्गों ने सरकार से आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करने की मांग की।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि खामनेई का बयान एक ओर जहां शांति की पहल को समर्थन देता है, वहीं दूसरी ओर यह संकेत भी देता है कि ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह युद्धविराम कितनी स्थिरता ला पाता है और क्षेत्र में तनाव को कितनी हद तक कम कर पाता है।