अक्तूबर माह में छात्रों को मिलेगी छात्रवृत्ति, मुख्य सचिव ने जारी किया आदेश

अक्तूबर माह में छात्रों को मिलेगी छात्रवृत्ति, मुख्य सचिव ने जारी किया आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पढ़ाई कर रहे लाखों विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 की छात्रवृत्ति (Scholarship) और शुल्क प्रतिपूर्ति (Fee Reimbursement) की राशि इस वर्ष अक्तूबर माह में जारी कर दी जाएगी। मुख्य सचिव द्वारा संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

यह आदेश न केवल यूपी बोर्ड (UP Board) बल्कि राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, डिग्री कॉलेजों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों पर भी लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रवृत्ति वितरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीकी निगरानी के तहत पूरी की जाएगी।

आदेश की मुख्य बाते

मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया है:

अक्तूबर माह में ही भुगतान – सभी पात्र छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि अक्टूबर माह के अंत तक सीधे बैंक खाते में भेज दी जाएगी।

ऑनलाइन सत्यापन – छात्रवृत्ति पोर्टल पर छात्रों की जानकारी और दस्तावेज़ों का डिजिटल सत्यापन अनिवार्य किया गया है।

विद्यालय/कॉलेज की जिम्मेदारी – संस्था प्रमुखों को निर्देशित किया गया है कि वे छात्रों के दस्तावेज़ समय से सत्यापित करें ताकि भुगतान प्रक्रिया में कोई देरी न हो।

भ्रष्टाचार पर रोक – सरकार ने कहा है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या संस्था प्रमुख के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

विशेष निगरानी – सामाजिक कल्याण विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को आदेश दिया गया है कि वे भुगतान प्रक्रिया की नियमित निगरानी करें और साप्ताहिक रिपोर्ट मुख्य सचिव कार्यालय को भेजें।

क्यों अहम है यह निर्णय?

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार शिक्षा के खर्च को वहन करने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजनाएं उनकी शिक्षा जारी रखने में मददगार साबित होती हैं।

यूपी बोर्ड में हर साल लगभग 55 लाख छात्र इंटरमीडिएट और हाईस्कूल में पंजीकृत होते हैं।

इनमें से बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग से आते हैं।

आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के छात्र भी अब इन योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं।

पिछले वर्षों में छात्रवृत्ति वितरण में अक्सर देरी होती थी, जिसकी वजह से छात्रों को फीस भरने और अन्य खर्चों में कठिनाई होती थी। इस बार आदेश में स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित कर दी गई है, जिससे छात्रों को राहत मिलेगी।

छात्रों की प्रतिक्रिया

लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्रा अनीता यादव कहती हैं – “हमारे लिए छात्रवृत्ति जीवन रेखा की तरह है। पिछले साल हमें दिसंबर में राशि मिली थी, जिससे काफी दिक्कत हुई थी। अगर इस बार अक्टूबर में मिल जाती है तो आगे की पढ़ाई और किताबों का इंतज़ाम समय पर हो जाएगा।”

इलाहाबाद (प्रयागराज) के छात्र अंशुमान मिश्र का कहना है – “मैं बीए का छात्र हूं। पिता किसान हैं और आमदनी सीमित है। फीस भरने में हमेशा समस्या होती है। सरकार का यह कदम सही समय पर राहत देने वाला है।”

शिक्षकों और विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञ प्रो. के.एन. तिवारी के अनुसार – “समय पर छात्रवृत्ति वितरण से ड्रॉपआउट दर कम होगी। जब छात्र आर्थिक दबाव से मुक्त होंगे, तो वे पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे पाएंगे।”

वहीं, सरकारी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रमेश चंद्र ने कहा – “ऑनलाइन सत्यापन से पारदर्शिता आएगी। पहले कई बार फर्जी छात्रों के नाम पर धनराशि निकल जाती थी। अब ऐसा संभव नहीं होगा।”

तकनीकी प्रबंधन

इस बार सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण के लिए आधुनिक तकनीकी उपाय अपनाए हैं:

  • आधार आधारित DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) – छात्रों के बैंक खाते सीधे आधार से लिंक किए जाएंगे ताकि राशि सीधे पहुंचे।
  • OTP वेरिफिकेशन – आवेदन करते समय मोबाइल नंबर पर OTP आएगा जिससे केवल वास्तविक छात्र ही प्रक्रिया पूरी कर सके।
  • डिजिटल ऑडिट – संपूर्ण भुगतान प्रक्रिया का डिजिटल ऑडिट होगा।

पिछली समस्याएं और समाधान

पिछले वर्षों में निम्न समस्याएं सामने आई थीं:

  • दस्तावेज़ सत्यापन में देर
  • बैंक खाते की जानकारी गलत होने से भुगतान अटक जाना
  • कई जिलों में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा
  • छात्रों को कई महीनों तक इंतज़ार करना
  • इस बार सरकार ने समाधान के तौर पर स्पष्ट समय सीमा, तकनीकी सत्यापन और कड़े दंड प्रावधान लागू किए हैं।

वित्तीय प्रावधान

राज्य सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण के लिए इस वर्ष हजारों करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों को शामिल किया गया है।

इंटरमीडिएट तक – लगभग 40 लाख छात्र लाभान्वित होंगे।

उच्च शिक्षा – करीब 15 लाख छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा।

समाज पर प्रभाव

यह कदम न केवल शिक्षा को प्रोत्साहित करेगा बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद करेगा। जब गरीब परिवार के बच्चे पढ़-लिखकर नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होंगे, तो राज्य की सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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