नई दिल्ली: GST परिषद ने सितंबर 2025 में अपनी 56वीं बैठक में कई उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी की घोषणा की। इस कटौती का उद्देश्य उपभोक्ता मांग को बढ़ावा देना और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में खपत को प्रोत्साहित करना है। खाद्य तेलों और दालों जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों पर जीएसटी दर को 12% और 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। यह कटौती 22 सितंबर, 2025 से लागू हो चुकी है।
जीएसटी कटौती का धमाका: दाल-तेल सस्ता, रसोई को राहत, त्योहारों में बढ़ेगी रौनक!
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में हालिया कटौती ने उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर व्यापक प्रभाव डाला है। विशेष रूप से, रोजमर्रा की जरूरतों जैसे दाल और खाद्य तेल की कीमतों में कमी की उम्मीद की जा रही है, जो भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा हैं। जीएसटी परिषद ने सितंबर 2025 में कई उपभोक्ता उत्पादों पर कर की दरों को कम करने का फैसला किया, जिसमें दाल और खाद्य तेल जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इस लेख में हम इस बात का विश्लेषण करेंगे कि जीएसटी में कटौती से दाल और तेल की कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, उपभोक्ताओं और उद्योग पर इसका क्या असर होगा, और यह कटौती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। यह लेख पूरी तरह से मौलिक है और कॉपीराइट मुक्त सामग्री प्रदान करता है।
जीएसटी कटौती का अवलोकन
जीएसटी परिषद ने सितंबर 2025 में अपनी 56वीं बैठक में कई उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी की घोषणा की। इस कटौती का उद्देश्य उपभोक्ता मांग को बढ़ावा देना और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में खपत को प्रोत्साहित करना है। खाद्य तेलों और दालों जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों पर जीएसटी दर को 12% और 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। यह कटौती 22 सितंबर, 2025 से लागू हो चुकी है। इस नीतिगत बदलाव से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में कमी की उम्मीद है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और खुदरा बाजार में मांग बढ़ेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस कटौती को “उपभोक्ता-हितैषी” कदम बताते हुए कहा कि इसका लाभ आम जनता तक पहुंचाने के लिए सरकार और उद्योग मिलकर काम करेंगे। इस कदम का उद्देश्य न केवल कीमतों को कम करना है, बल्कि दीवाली जैसे त्योहारी मौसम में मांग को बढ़ावा देना भी है।
दाल की कीमतों पर प्रभाव
दाल भारत में प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है और यह हर भारतीय घर की रसोई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत दुनिया में दाल का सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक है, फिर भी आयात पर निर्भरता बनी रहती है। जीएसटी में कटौती से दाल की कीमतों में कमी की उम्मीद है, क्योंकि कर की दर में कमी से उत्पादन और वितरण लागत कम होगी।
दाल की कीमतों में कितनी कमी आएगी?
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, दाल पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% करने से इसकी खुदरा कीमत में 6-8% की कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी विशेष प्रकार की दाल (जैसे अरहर या चना दाल) की कीमत पहले 120 रुपये प्रति किलोग्राम थी, तो जीएसटी कटौती के बाद इसकी कीमत 110-112 रुपये प्रति किलोग्राम तक कम हो सकती है। यह कमी उपभोक्ताओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दाल की कीमतें हाल के वर्षों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मुद्रास्फीति के कारण बढ़ रही थीं।
दाल उद्योग पर प्रभाव
दाल के व्यापारियों और निर्माताओं का कहना है कि जीएसटी कटौती से उनकी कार्यशील पूंजी में सुधार होगा, क्योंकि कम कर दरों के कारण इनपुट लागत में कमी आएगी। इसके अलावा, दाल के आयात पर लागू सीमा शुल्क को भी हाल ही में 10% तक कम किया गया है, जिससे आयातित दाल की लागत और कम होगी। इससे विशेष रूप से उन दालों की कीमतों में कमी आएगी जो भारत में कम उत्पादित होती हैं, जैसे मसूर और मूंग दाल।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में कमी का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक तभी पहुंचेगा, जब निर्माता और खुदरा विक्रेता इस कटौती को पूरी तरह से लागू करें। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह 54 उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखेगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जीएसटी कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे।
खाद्य तेल की कीमतों पर प्रभाव
खाद्य तेल, जैसे सरसों का तेल, सूरजमुखी तेल, और पाम तेल, भारतीय भोजन में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, जिसके कारण इसकी कीमतें वैश्विक बाजार की कीमतों और आयात शुल्क पर निर्भर करती हैं। जीएसटी कटौती और हाल ही में कच्चे खाद्य तेल पर सीमा शुल्क में कमी से खाद्य तेल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी की उम्मीद है।
खाद्य तेल की कीमतों में कितनी कमी आएगी?
खाद्य तेल पर जीएसटी दर को 18% से घटाकर 5% करने से इसकी कीमत में 8-10% की कमी आने की संभावना है। उदाहरण के लिए, यदि एक लीटर सरसों का तेल पहले 150 रुपये में बिक रहा था, तो जीएसटी कटौती के बाद इसकी कीमत 135-140 रुपये तक कम हो सकती है। इसके अतिरिक्त, अगस्त 2025 में कच्चे खाद्य तेल पर सीमा शुल्क को 10% तक कम करने के सरकार के फैसले से आयातित तेल की लागत में और कमी आएगी।
खाद्य तेल उद्योग पर प्रभाव
खाद्य तेल उद्योग के लिए यह कटौती दोहरे लाभ के रूप में सामने आई है। पहला, जीएसटी में कमी से उत्पादन और पैकेजिंग लागत कम होगी। दूसरा, सीमा शुल्क में कमी से आयातित कच्चे तेल की लागत कम होगी, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महत्वपूर्ण है। उद्योग निकायों, जैसे सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि इससे खाद्य तेल की कीमतें स्थिर होंगी और उपभोक्ता मांग बढ़ेगी।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण, जीएसटी और सीमा शुल्क में कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लग सकता है। इसके अलावा, कुछ निर्माताओं के पास पहले से ही पुराने स्टॉक हैं, जिन पर पुरानी जीएसटी दरों के आधार पर मूल्य निर्धारित किया गया है। उद्योग ने सरकार से अनुरोध किया है कि पुराने स्टॉक को नई दरों पर बेचने की अनुमति दी जाए ताकि पैकेजिंग सामग्री की बर्बादी से बचा जा सके।
उपभोक्ताओं के लिए लाभ
जीएसटी कटौती का सबसे बड़ा लाभ उपभोक्ताओं, विशेष रूप से मध्यम और निम्न-आय वर्ग के परिवारों को मिलेगा। दाल और खाद्य तेल भारतीय भोजन का आधार हैं, और इनकी कीमतों में कमी से घरेलू बजट पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उदाहरण के लिए, एक औसत भारतीय परिवार जो प्रतिमाह 5 किलोग्राम दाल और 5 लीटर खाद्य तेल की खपत करता है, वह इस कटौती के बाद प्रति माह लगभग 100-150 रुपये की बचत कर सकता है। यह बचत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा दे सकती है।
इसके अलावा, जीएसटी कटौती का समय त्योहारी मौसम के साथ मेल खाता है, जब उपभोक्ता खर्च में वृद्धि होती है। इससे खुदरा बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस कटौती से तेजी से बढ़ने वाली उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) क्षेत्र में 8-10% की वृद्धि हो सकती है।
अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव
जीएसटी कटौती का प्रभाव केवल दाल और खाद्य तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है। यह अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। पहला, कम कीमतों से उपभोक्ता मांग में वृद्धि होगी, जो खुदरा और विनिर्माण क्षेत्रों को प्रोत्साहित करेगी। दूसरा, यह कटौती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में दाल और खाद्य तेल की खपत अधिक होती है। तीसरा, यह कदम मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करेगा, जो हाल के वर्षों में खाद्य कीमतों में वृद्धि के कारण एक चुनौती बनी हुई थी।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को राजस्व में कमी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि जीएसटी दरों में कटौती से कर संग्रह प्रभावित होगा। लेकिन वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह कटौती अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देकर इस कमी की भरपाई करेगी। इसके अलावा, सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि जीएसटी कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे, जिसके लिए सीबीआईसी द्वारा कीमतों की निगरानी की जा रही है।
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
हालांकि जीएसटी कटौती एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। पहला, निर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे इस कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं। दूसरा, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और दाल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस कटौती के प्रभाव को कम कर सकता है। तीसरा, पुराने स्टॉक को नई दरों पर बेचने की अनुमति देने के लिए सरकार को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने होंगे।
भविष्य की संभावनाओं के दृष्टिकोण से, जीएसटी कटौती भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर सकती है। यह कदम न केवल उपभोक्ता मांग को बढ़ाएगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों को भी प्रोत्साहित करेगा, जो दाल और खाद्य तेल के व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।