जीएसटी दरों में कटौती से वाराणसी में वाहनों की बुकिंग में उछाल, डीलरों के चेहरे पर मुस्कान

वाराणसी मे जीएसटी से व्यापारी गदगद

भारत सरकार के हालिया फैसले ने ऑटोमोबाइल उद्योग को नई जान फूंक दी है। जीएसटी काउंसिल की ताजा बैठक में वाहनों पर लगने वाली जीएसटी दरों में महत्वपूर्ण कटौती का ऐलान किया गया, जिसका असर बाजार पर तुरंत दिखाई देने लगा। खासकर वाराणसी जैसे शहरों में, जहां ऑटोमोबाइल डीलरशिप्स पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रही थीं, अब बुकिंग्स की बाढ़ आ गई है।

जीएसटी दरों में कटौती से वाराणसी में वाहनों की बुकिंग में उछाल, डीलरों के चेहरे पर मुस्कान

वाराणसी, 15 सितंबर 2025: भारत सरकार के हालिया फैसले ने ऑटोमोबाइल उद्योग को नई जान फूंक दी है। जीएसटी काउंसिल की ताजा बैठक में वाहनों पर लगने वाली जीएसटी दरों में महत्वपूर्ण कटौती का ऐलान किया गया, जिसका असर बाजार पर तुरंत दिखाई देने लगा। खासकर वाराणसी जैसे शहरों में, जहां ऑटोमोबाइल डीलरशिप्स पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रही थीं, अब बुकिंग्स की बाढ़ आ गई है। डीलरों का कहना है कि यह कटौती ग्राहकों के लिए राहत लेकर आई है और सेक्टर को बम्पर बिक्री का मौका मिला है। इस फैसले से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, बल्कि उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति में भी इजाफा हुआ है।जीएसटी, या गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स, भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली का आधार स्तंभ है। 2017 में लागू होने के बाद से यह व्यवस्था व्यापार को सुगम बनाने का दावा करती रही है, लेकिन कई सेक्टर्स में उच्च दरों ने विकास की रफ्तार को धीमा कर दिया। वाहन उद्योग, जो देश की जीडीपी में 7% से अधिक का योगदान देता है, लंबे समय से दरों में कमी की मांग करता आ रहा था। सितंबर 2025 की जीएसटी काउंसिल बैठक में, वित्त मंत्री ने घोषणा की कि मिड-साइज कारों और एसयूवी पर 28% से घटाकर 18% जीएसटी लगाई जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों पर यह दर पहले से ही 5% थी, लेकिन अब पेट्रोल-डीजल वाहनों को भी राहत मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम इन्फ्लेशन को नियंत्रित करने और उपभोक्ता मांग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
वाराणसी, जिसे बनारस के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। गंगा नदी के तट पर बसा यह शहर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां की सड़कें हमेशा से ही वाहनों की भीड़ से गुलजार रही हैं, लेकिन कोविड-19 महामारी और उसके बाद की आर्थिक मंदी ने ऑटो सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया। स्थानीय डीलरों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में बिक्री में 30% की गिरावट आई थी। लेकिन जीएसटी कटौती के ऐलान के बाद, मात्र 48 घंटों में ही प्रमुख ब्रांड्स जैसे मारुति सुजुकी, हुंडई और टाटा मोटर्स की डीलरशिप्स पर बुकिंग्स की संख्या दोगुनी हो गई।
एक प्रमुख डीलर, वाराणसी के लहरतारा इलाके में स्थित ‘वाराणसी ऑटोमोबाइल्स’ के मालिक राजेश कुमार ने बताया, “यह हमारे लिए दिवाली का तोहफा साबित हुआ है। पहले ग्राहक उच्च कीमतों को देखकर हिचकिचाते थे, लेकिन अब 10-15% की बचत से वे उत्साहित हैं। कल ही हमने 50 से अधिक कारों की बुकिंग ली, जो सामान्य दिनों से चार गुना ज्यादा है।” राजेश के अलावा, अन्य डीलर भी इसी खुशी का इजहार कर रहे हैं। महमूरगंज स्थित हुंडई शोरूम के मैनेजर अनिल सिंह ने कहा, “ग्रामीण इलाकों से भी पूछताछ बढ़ी है। किसान और छोटे व्यापारी, जो पहले महंगे वाहनों से दूर रहते थे, अब मॉडल्स जैसे क्रेटा और वेर्ना की ओर रुख कर रहे हैं।”
यह बम्पर बुकिंग का दौर केवल डीलरों तक सीमित नहीं है। स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। वाहन खरीदारी से जुड़े सहायक उद्योग जैसे फाइनेंस कंपनियां, इंश्योरेंस प्रोवाइडर्स और एक्सेसरी शॉप्स भी फायदा उठा रही हैं। उदाहरण के लिए, वाराणसी के सिगरा घाट क्षेत्र में स्थित एक फाइनेंस फर्म के अधिकारी ने बताया कि लोन एप्लीकेशन्स में 40% की वृद्धि हुई है। लोग अब ईएमआई को अधिक किफायती पा रहे हैं, क्योंकि कुल लागत कम हो गई है। इसके अलावा, सेकंड-हैंड कार मार्केट भी गुलजार हो गया है, जहां पुराने वाहनों की कीमतें भी ऊपर चढ़ रही हैं।
लेकिन क्या यह उत्साह स्थायी है? ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मत भिन्न है। ऑटोमोबाइल रिसर्च एनालिस्ट सोनाली मेहता कहती हैं, “जीएसटी कटौती निश्चित रूप से मांग को प्रोत्साहित करेगी, लेकिन वैश्विक चिप की कमी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें चुनौतियां बनी रहेंगी। वाराणसी जैसे शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी बिक्री को प्रभावित कर सकती है। फिर भी, यह कदम सेक्टर को 20-25% की वृद्धि दे सकता है।” मेहता के अनुसार, सरकार का यह फैसला ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूत करेगा, क्योंकि कम टैक्स से निर्यात प्रतिस्पर्धी बनेगा।
वाराणसी के संदर्भ में देखें तो शहर की भौगोलिक स्थिति इसे विशेष बनाती है। यहां से जुड़े राजमार्ग जैसे वाराणसी-लखनऊ हाईवे और गोरखपुर रोड पर वाहनों की मांग हमेशा ऊंची रहती है। पर्यटक और तीर्थयात्री भी निजी वाहनों पर निर्भर हैं। जीएसटी कटौती से अब मध्यम वर्ग के परिवार आसानी से फैमिली कार खरीद पा रहे हैं। एक स्थानीय निवासी, शिक्षक रामेश्वर पांडे ने अपनी नई बुक की गई कार के बारे में कहा, “पहले 12 लाख की कार पर 3 लाख से ज्यादा टैक्स लगता था, अब यह बोझ कम हो गया। हमारा परिवार अब सुरक्षित यात्रा कर सकेगा।”
इस फैसले के पीछे राजनीतिक और आर्थिक मंशा भी छिपी है। 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश सरकार उपभोक्ता-अनुकूल नीतियों पर जोर दे रही है। जीएसटी काउंसिल, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें शामिल हैं, ने इस कटौती को ‘आम आदमी की जेब राहत’ के रूप में पेश किया। लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह अल्पकालिक उपाय है। अर्थशास्त्री डॉ. अजय वर्मा का कहना है, “टैक्स कटौती से राजस्व में कमी आएगी, जो विकास परियोजनाओं को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय में, उद्योग को स्वच्छ ऊर्जा की ओर शिफ्ट करने पर फोकस करना चाहिए।” वर्मा के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों पर अतिरिक्त सब्सिडी इस दिशा में सकारात्मक कदम होगी।
वाराणसी के डीलर एसोसिएशन ने इस अवसर पर एक विशेष मीटिंग बुलाई, जहां उन्होंने सरकार का धन्यवाद किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील गुप्ता ने कहा, “हमारे सदस्यों की बिक्री में 50% तक इजाफा होने की उम्मीद है। लेकिन हमें स्टॉक मैनेजमेंट पर ध्यान देना होगा, क्योंकि मैन्युफैक्चरर्स सप्लाई चेन को मजबूत कर रहे हैं।” गुप्ता ने आगे बताया कि अगले तीन महीनों में वाराणसी में 5,000 से अधिक नई कारों की डिलीवरी हो सकती है, जो स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देगी। ऑटो सेक्टर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10 लाख से अधिक लोग जुड़े हैं, और इस बूम से युवाओं को नौकरियां मिलेंगी।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से यह फैसला दोधारी तलवार है। एक ओर, अधिक वाहनों से प्रदूषण बढ़ सकता है, खासकर वाराणसी जैसे शहर में जहां वायु गुणवत्ता पहले से ही चिंताजनक है। दूसरी ओर, कम जीएसटी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुझान बढ़ेगा, जो ग्रीन मोबिलिटी को प्रोत्साहित करेगा। टाटा मोटर्स के एक प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी नेक्सॉन ईवी मॉडल की बुकिंग्स में 70% की वृद्धि हुई है। सरकार ने भी घोषणा की है कि अगले बजट में ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए फंडिंग बढ़ाई जाएगी।
ग्राहकों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प हैं। सोशल मीडिया पर #GSTCutVaranasi जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग अपनी बुकिंग स्टोरीज शेयर कर रहे हैं। एक युवा उद्यमी, प्रिया सिंह ने पोस्ट किया, “अब मेरी ड्रीम कार मेरे गैरेज में आने वाली है। थैंक यू गवर्नमेंट!” लेकिन कुछ लोग सतर्क हैं। एक रिटायर्ड इंजीनियर ने चिंता जताई कि कटौती के बाद कीमतें स्थिर रहेंगी या नहीं। डीलरों का आश्वासन है कि मैन्युफैक्चरर्स प्राइस कट को पास-ऑन करेंगे।
कुल मिलाकर, जीएसटी कटौती ने वाराणसी के ऑटो मार्केट को नई ऊर्जा दी है। डीलरों की खुशी साफ दिख रही है, और शहर की सड़कें जल्द ही नई गाड़ियों से सजेंगी। लेकिन सतत विकास के लिए नीतियों को संतुलित रखना जरूरी होगा। यह फैसला न केवल आर्थिक राहत है, बल्कि उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने वाला कदम भी। भविष्य में यदि इसी तरह के सुधार होते रहे, तो भारतीय ऑटो इंडस्ट्री वैश्विक पटल पर मजबूत स्थिति हासिल कर लेगी।

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