खान सर के हॉस्पिटल मे हुई तोड़ फोड़, उखाड़ दिये गए टाइल्स मार्बल क्या कहा खान सर ने?
पटना, 05 सितंबर 2025 – बिहार की राजधानी पटना में मशहूर शिक्षक और सोशल एक्टिविस्ट खान सर (फैसल खान) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका निर्माणाधीन अस्पताल है, जहां हाल ही में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में लगे महंगे टाइल्स और मार्बल को रातोंरात उखाड़ दिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और खबरों से यह प्रतीत हो रहा था कि अस्पताल में कोई तोड़फोड़ हुई है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। यह कोई बाहरी हमला या विनाशकारी घटना नहीं, बल्कि एक जरूरी सुधार था जो अस्पताल की सुरक्षा और स्वच्छता मानकों को ध्यान में रखकर किया गया। खान सर ने खुद इस पर खुलकर बात की और बताया कि यह फैसला क्यों लिया गया। इस घटना ने न केवल अस्पताल निर्माण की चुनौतियों को उजागर किया है, बल्कि खान सर की स्वास्थ्य सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को भी सामने लाया है।
खान सर, जिन्हें पटना के छात्र-छात्राएं ‘खान सर पटना’ के नाम से जानते हैं, मूल रूप से एक शिक्षक हैं। उन्होंने अपनी यूट्यूब चैनल और कोचिंग संस्थान के माध्यम से लाखों छात्रों को सिविल सर्विसेज, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई है। उनकी सरल भाषा, हास्यपूर्ण अंदाज और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया है। लेकिन अब वे शिक्षा से आगे बढ़कर स्वास्थ्य क्षेत्र में कदम रख रहे हैं। पटना में बन रहा उनका अस्पताल एक ऐसा प्रोजेक्ट है जो गरीबों और आम आदमी के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का वादा करता है। खान सर का दावा है कि यहां इलाज सरकारी अस्पतालों से भी सस्ता होगा, जिससे बिहार जैसे राज्य में जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, एक बड़ा बदलाव आ सकता है।
तेजी से चल रहा है हॉस्पिटल का निर्माण-कार्य
अस्पताल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसमें ब्लड बैंक, डायलिसिस सेंटर, कैंसर अस्पताल जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। हाल ही में खान सर ने सोशल मीडिया पर एक दर्जन डायलिसिस मशीनों का वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने बताया कि ये मशीनें गरीब मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होंगी। अस्पताल का उद्देश्य सिर्फ इलाज प्रदान करना नहीं है, बल्कि मरीजों को सम्मान और आत्मविश्वास देना भी है। खान सर ने घोषणा की है कि उनके अस्पताल या डायलिसिस सेंटर में किसी को ‘मरीज’ या ‘पेशेंट’ नहीं कहा जाएगा। इसके बजाय, हर व्यक्ति को ‘मेहमान’ (गेस्ट) के रूप में संबोधित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “बीमार व्यक्ति पहले से ही दर्द और तकलीफ से गुजर रहा होता है। अगर उसे मरीज या पेशेंट कहकर पुकारा जाए तो उसका आत्मविश्वास और गिर जाता है। इसलिए मेरे सेंटर में सभी को गेस्ट कहा जाएगा।” यह दृष्टिकोण खान सर की मानवीय सोच को दर्शाता है, जहां इलाज के साथ-साथ भावनात्मक समर्थन पर भी जोर दिया जा रहा है।
अब बात उस घटना की जो सुर्खियां बनी। अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में खान सर ने बड़े शौक से महंगे और चमकदार टाइल्स लगवाए थे। ये टाइल्स मार्बल जैसे दिखते थे और ओटी को एक प्रीमियम लुक दे रहे थे। लेकिन निर्माण के दौरान एक सरकारी इंस्पेक्शन हुआ, जिसमें अधिकारियों ने इन टाइल्स को अनुपयुक्त बताया। वजह? टाइल्स के बीच में जॉइंट्स (जोड़) होते हैं, जहां बैक्टीरिया, वायरस और फंगस जमा हो सकते हैं। ये सूक्ष्म जीव इतने छोटे होते हैं कि एक सरसों के दाने में हजारों की संख्या में फिट हो सकते हैं। ऑपरेशन थिएटर जैसी जगह पर जहां सर्जरी होती है, वहां संक्रमण का खतरा बिल्कुल नहीं लिया जा सकता। अगर कोई संक्रमण फैलता है तो मरीज की जान पर बन सकती है। इसलिए, अधिकारियों के निर्देश पर इन टाइल्स को रातोंरात उखाड़ दिया गया।
खान सर ने इस घटना पर एक वीडियो में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “इतना शौक से मैंने मार्बल लगवाएं थे लेकिन सब तोड़कर निकलना पड़ा। इसके बाद ओटी मैट लगाना पड़ा। यह बेहद खास मैट होता है जिसमें कोई भी ज्वाइंट नहीं होता है। पूरे ऑपरेशन थिएटर में फिर इसी तरह का मैट लगाया गया। इस मैट को खास ऑपरेशन थिएटर में भी लगाने के लिए बनाया जाता है। देखने में बिल्कुल मार्बल जैसा ही लगता है।” उनकी यह बात दर्शाती है कि वे कितने ईमानदार और सीखने को तैयार हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें पहले इस बात की जानकारी नहीं थी कि ओटी में टाइल्स लगाना सही नहीं होता। यह गलती निर्माण के दौरान हुई, लेकिन इसे तुरंत सुधार लिया गया। अब ओटी में एक विशेष मैट लगा है जो पूरी तरह सपाट है, कोई जोड़ नहीं है और संक्रमण से मुक्त है।
यह घटना अस्पताल निर्माण की जटिलताओं को उजागर करती है। स्वास्थ्य क्षेत्र में स्वच्छता और सुरक्षा के मानक बहुत सख्त होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अस्पतालों में संक्रमण की दर वैश्विक स्तर पर 7-10% तक होती है, और विकासशील देशों में यह और ज्यादा है। भारत में भी, कई अस्पतालों में अपर्याप्त स्वच्छता के कारण मरीजों को अतिरिक्त जोखिम उठाना पड़ता है। खान सर का अस्पताल इन मानकों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। टाइल्स हटाने की घटना से साबित होता है कि वे कोई समझौता नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय, वे सीख रहे हैं और बेहतर बना रहे हैं।
खान सर की यह पहल बिहार के स्वास्थ्य परिदृश्य में एक क्रांति ला सकती है। बिहार में सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी, डॉक्टरों की कमी और महंगे इलाज की समस्या आम है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को पटना जैसे शहरों में इलाज के लिए भटकना पड़ता है। खान सर का अस्पताल इन समस्याओं का समाधान हो सकता है। उन्होंने वादा किया है कि यहां ब्लड बैंक से लेकर कैंसर ट्रीटमेंट तक सब कुछ सस्ता होगा। उदाहरण के लिए, डायलिसिस जैसी महंगी प्रक्रिया, जो प्राइवेट अस्पतालों में हजारों रुपये खर्च कराती है, यहां न्यूनतम दर पर उपलब्ध होगी। इसके अलावा, अस्पताल में मरीजों को ‘मेहमान’ कहकर पुकारने की नीति से उनका मनोबल बढ़ेगा, जो इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मनोविज्ञान के अनुसार, सकारात्मक वातावरण मरीजों की रिकवरी को 20-30% तक तेज कर सकता है।
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी। कई यूजर्स ने इसे ‘तोड़फोड़’ बताकर सनसनी फैलाई, लेकिन खान सर के वीडियो से सच्चाई सामने आई। उनके प्रशंसक अब और उत्साहित हैं, क्योंकि यह दिखाता है कि खान सर कितने पारदर्शी हैं। वे अपनी गलतियों को छिपाते नहीं, बल्कि उन्हें सुधारते हैं। पटना के स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह अस्पताल शहर के लिए एक वरदान होगा। एक स्थानीय डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “खान सर जैसे लोग स्वास्थ्य क्षेत्र में आते हैं तो बदलाव आता है। सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार और लापरवाही आम है, लेकिन यहां ईमानदारी दिख रही है।”
खान सर की यात्रा प्रेरणादायक है। एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की, और अब स्वास्थ्य में। उनकी सफलता का राज उनकी मेहनत और जनता से जुड़ाव है। अस्पताल का निर्माण पूरा होने पर यह बिहार का एक मॉडल अस्पताल बन सकता है, जहां सस्ता इलाज, स्वच्छता और सम्मान सब कुछ मिलेगा। टाइल्स उखाड़ने की घटना एक छोटी सी बाधा थी, लेकिन इससे खान सर की दृढ़ता और मजबूत हुई।
अंत में, खान सर का संदेश स्पष्ट है: स्वास्थ्य सेवा सिर्फ दवा और मशीनों का खेल नहीं, बल्कि इंसानियत का मामला है। उनका अस्पताल न केवल बीमारियों का इलाज करेगा, बल्कि समाज की सोच को भी बदलेगा। पटना और बिहार के लोग अब इंतजार कर रहे हैं उस दिन का जब यह अस्पताल खुलकर सेवा शुरू करेगा। यह घटना हमें सिखाती है कि बड़े सपनों में छोटी गलतियां होती हैं, लेकिन उन्हें सुधारकर ही सफलता मिलती है।