धार्मिक नगरी काशी में आज से शुरू हो रही शारदीय नवरात्रि का उत्साह चारों ओर फैल चुका है। गंगा के घाटों पर मां दुर्गा की आरती, काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें और दुर्गा पूजा की तैयारियां शहर को भक्तिमय बना रही हैं। लेकिन इस पावन अवसर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वाराणसी नगर निगम ने आज से अगले 10 दिनों तक पूरे नगर क्षेत्र में मीट, मुर्गा और मछली की सभी दुकानों को बंद रखने का सख्त आदेश जारी किया है।
वाराणसी मे मीट-मुर्गा की दुकानों पर ताला, भक्तिमय होगा पूरा शहर
वाराणसी, जिसे धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र माना जाता है, में नवरात्र के अवसर पर प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। नवरात्र के नौ दिनों के दौरान पूरे शहर में मीट और मुर्गे की दुकानों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। यह निर्णय मुख्यतः श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना और भक्ति पूरे देश में विशेष महत्व रखती है। वाराणसी, जहां हर गली-मोहल्ले में मंदिरों की घंटियां और भजन गूंजते हैं, वहां इस पावन पर्व पर वातावरण को शुद्ध और सात्विक बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
प्रशासनिक आदेश और पालन
नगर निगम व जिला प्रशासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि नवरात्र की अवधि में मीट, मछली और मुर्गे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी तय की गई है। आदेश में कहा गया है कि किसी भी बाजार, ठेले या खुले स्थान पर इस अवधि में मांसाहारी वस्तुओं की बिक्री नहीं होगी।
स्थानीय पुलिस-प्रशासन को निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है ताकि किसी भी तरह से आदेश का उल्लंघन न हो। प्रशासन ने दुकानदारों को पहले ही सूचित कर दिया है ताकि किसी को अचानक दिक्कत का सामना न करना पड़े।
आस्था से जुड़ा मुद्दा
नवरात्र का पर्व हिंदू समाज में सात्विकता और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान मांसाहार, मद्यपान और तामसिक चीजों का सेवन वर्जित समझा जाता है। वाराणसी जैसे शहर, जहां लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से आकर दर्शन-पूजन करते हैं, वहां इस धार्मिक परंपरा का विशेष महत्व है।
कई श्रद्धालु मानते हैं कि नवरात्र में शहर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय होना चाहिए। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, हवन और भजन-कीर्तन आयोजित होते हैं। ऐसे में मांसाहार की दुकानें खुली रहने से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
व्यापारियों की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, मीट और मुर्गा बेचने वाले व्यापारियों का कहना है कि यह आदेश उनके व्यापार को प्रभावित करता है। नवरात्र के दिनों में पहले से ही बिक्री में कमी आ जाती है, और अब दुकानों को पूरी तरह बंद करने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
हालांकि, अधिकांश दुकानदारों ने प्रशासन के आदेश का सम्मान करने और आस्था को प्राथमिकता देने की बात कही है। उनका कहना है कि यह पर्व साल में केवल दो बार आता है और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए वे सहयोग करने को तैयार हैं।
धार्मिक पर्यटन पर असर
वाराणसी नवरात्र और दशहरा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही देखता है। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा और गंगा घाटों पर होने वाले धार्मिक आयोजन, शहर को एक अद्भुत आध्यात्मिक रंग देते हैं।
धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी प्रशासन का यह फैसला स्वागत योग्य माना जा रहा है। सात्विक वातावरण और स्वच्छता बनाए रखने से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सकारात्मक अनुभव मिलेगा।
अन्य शहरों में भी ऐसा नियम
केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि देश के कई धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों में नवरात्र के दौरान मीट और शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाती है। अयोध्या, हरिद्वार, मथुरा और उज्जैन जैसे तीर्थ स्थलों पर भी इसी तरह की परंपरा देखने को मिलती है।
यह प्रथा न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करती है बल्कि सामाजिक समरसता और पवित्रता का संदेश भी देती है।
सामाजिक दृष्टिकोण
समाजशास्त्रियों का मानना है कि ऐसे निर्णय धार्मिक परंपरा और सामाजिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। सात्विक जीवनशैली और व्रत-उपवास जैसे अभ्यास से लोगों के जीवन में संयम और आत्मसंयम की भावना आती है।
नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला पर्व भी है। ऐसे में वातावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए मीट-मुर्गा की दुकानों का बंद रहना एक सकारात्मक पहल है।