“सुप्रीम कोर्ट के TET फैसले के बाद सीएम योगी की बड़ी पहल: लाखों शिक्षकों को राहत की उम्मीद!”

TET खबर उत्तर प्रदेश

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने देश भर के लाखों शिक्षकों के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। 1 सितंबर 2025 को आए इस फैसले में कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों के लिए अनिवार्य कर दिया है। सेवा में बने रहने, प्रमोशन या नई नियुक्तियों के लिए टीईटी पास करना अब जरूरी हो गया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य पर पड़ेगा, जहां करीब 9 लाख से अधिक सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं।

“सुप्रीम कोर्ट के TET फैसले के बाद सीएम योगी की बड़ी पहल: लाखों शिक्षकों को राहत की उम्मीद!”

लखनऊ, 16 सितंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने देश भर के लाखों शिक्षकों के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। 1 सितंबर 2025 को आए इस फैसले में कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों के लिए अनिवार्य कर दिया है। सेवा में बने रहने, प्रमोशन या नई नियुक्तियों के लिए टीईटी पास करना अब जरूरी हो गया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य पर पड़ेगा, जहां करीब 9 लाख से अधिक सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 10 सितंबर को हुई महत्वपूर्ण बैठक ने शिक्षकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। बैठक के बाद राज्य सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि शिक्षकों को विशेष राहत पैकेज दिया जा सकता है, जिसमें टीईटी की तैयारी के लिए ट्रेनिंग, समय विस्तार और आर्थिक सहायता शामिल हो सकती है। यह बैठक न केवल शिक्षक समुदाय के लिए एक सकारात्मक संदेश है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक कदम भी माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक लंबी कानूनी लड़ाई का परिणाम है। 2011 में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी को शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता के रूप में लागू किया था, लेकिन कई राज्यों में इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया। कई मामलों में शिक्षक बिना टीईटी के सेवा में बने हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि टीईटी केवल नई भर्तियों के लिए नहीं, बल्कि मौजूदा शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि दो वर्ष के भीतर सभी शिक्षकों को टीईटी पास करना होगा, वरना उनकी सेवा पर असर पड़ सकता है। इस फैसले से देश भर में करीब 20 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के शिक्षक सबसे अधिक संख्या में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों के लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में स्थिति और जटिल है। राज्य में 2011 से चली आ रही 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है, जहां टीईटी एक प्रमुख मुद्दा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगस्त 2024 में मेरिट लिस्ट को अमान्य घोषित किया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2024 में इसे होल्ड कर दिया। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले ने पुरानी भर्ती को भी प्रभावित कर दिया है। राज्य के शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में करीब 4 लाख शिक्षक ऐसे हैं जो अभी तक टीईटी पास नहीं कर पाए हैं। इनमें से अधिकांश ग्रामीण इलाकों से हैं, जहां इंटरनेट सुविधा और कोचिंग सेंटरों की कमी है। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर राहत न मिली तो शिक्षा व्यवस्था ठप हो सकती है।
ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्वरित कार्रवाई की। 10 सितंबर को लखनऊ में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा निदेशक और शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के मुख्य एजेंडे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विश्लेषण और राज्य स्तर पर समाधान ढूंढना शामिल था। सूत्रों के अनुसार, सीएम ने साफ कहा कि “शिक्षक राष्ट्र निर्माण के आधार हैं, उनकी चिंता हमारी चिंता है। कोई भी शिक्षक बिना योग्यता के नहीं हटेगा, बल्कि हम उन्हें योग्य बनाने का प्रयास करेंगे।” बैठक में टीईटी परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष अभियान चलाने, ऑनलाइन कोचिंग मॉड्यूल विकसित करने और असफल उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा का अवसर देने पर चर्चा हुई। इसके अलावा, राज्य सरकार टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों को दो वर्ष की मोहलत देने की योजना बना रही है, जिसमें ट्रेनिंग प्रोग्राम शामिल होंगे।
शिक्षक समुदाय में इस बैठक से उत्साह है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी ने कहा, “सीएम की बैठक ने हमें आश्वासन दिया है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार टीईटी को अनिवार्य बनाए रखते हुए भी शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रखेगी। ग्रामीण शिक्षकों के लिए विशेष कोटा और मुफ्त कोचिंग की मांग हमारी प्राथमिकता है।” इसी तरह, माध्यमिक शिक्षक फेडरेशन की महासचिव रेनू सिंह ने बताया कि बैठक में प्रमोशन नीति पर भी चर्चा हुई, जहां टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों को अस्थायी छूट दी जा सकती है। शिक्षकों का मानना है कि यह राहत न केवल उनकी नौकरी बचाएगी, बल्कि शिक्षा स्तर को भी ऊंचा उठाएगी।
राज्य सरकार की ओर से पहले ही कुछ कदम उठाए जा चुके हैं। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर सीएम योगी ने सभी सरकारी शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, प्रशिक्षकों और रसोइयों के लिए कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट की घोषणा की थी। यह सुविधा लगभग 9 लाख शिक्षक परिवारों को लाभ पहुंचाएगी। अब टीईटी फैसले के बाद यह घोषणा और प्रासंगिक हो गई है। शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करेगी, लेकिन राज्य स्तर पर लचीलापन अपनाएगी। हम टीईटी की विशेष परीक्षा आयोजित करेंगे और असफल शिक्षकों के लिए री-टेस्ट का प्रावधान करेंगे।”
विशेषज्ञों का विश्लेषण भी सकारात्मक है। शिक्षा नीति विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही दिशा में है, लेकिन इसे लागू करने में मानवीय पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां शिक्षक अधिभारित हैं, वहां ट्रेनिंग जरूरी है। सीएम योगी की बैठक इसी दिशा में एक अच्छा कदम है। यदि सरकार समय पर अमल करती है तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए बनेगा।” वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत डिजिटल शिक्षा पर जोर दिया गया है, जो टीईटी तैयारी में मददगार साबित हो सकता है। राज्य सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मुफ्त स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराने की योजना बना रही है।
हालांकि, चुनौतियां अभी बाकी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी, उम्रदराज शिक्षकों की समस्या और परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता जैसे मुद्दे हैं। शिक्षक संगठन मांग कर रहे हैं कि टीईटी को दो वर्ष के बजाय पांच वर्ष का समय दिया जाए। इसके अलावा, 69,000 भर्ती मामले में फंसे अभ्यर्थियों को भी टीईटी में छूट की मांग तेज हो गई है। यदि सरकार इन मांगों पर विचार करती है तो राहत व्यापक होगी।
कुल मिलाकर, सीएम योगी की बैठक ने शिक्षकों को आशा की किरण दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला कठोर लग सकता है, लेकिन राज्य सरकार की सक्रियता से यह अवसर में बदल सकता है। उत्तर प्रदेश, जो शिक्षा के क्षेत्र में पहले से ही प्रगति कर रहा है, अब टीईटी को एक मील का पत्थर बना सकता है। शिक्षकों की उम्मीदें परवान चढ़ें, इसके लिए सरकार के अगले कदमों पर नजरें टिकी हैं। यह न केवल शिक्षकों की बल्कि पूरे राष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *