GST दरों में कटौती के बावजूद ग्राहकों को राहत नहीं: दुकानदार क्यों बरकरार रखे पुराने दाम?
नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा हाल ही में कई आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी (GST) दरों में कटौती की गई है, लेकिन सड़क पर आम ग्राहक को इसकी कोई राहत नजर नहीं आ रही। दुकानदार पुराने दामों पर ही सामान बेच रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है। जीएसटी कम होने के फायदे ग्राहकों तक पहुंचाने का वादा किया गया था, लेकिन हकीकत में यह लाभ कहीं नजर नहीं आ रहा। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि जीएसटी दर कटौती के बाद भी दाम क्यों नहीं घट रहे, दुकानदारों की मजबूरी क्या है और ग्राहक क्या कर सकते हैं।
जीएसटी दर कटौती का ऐलान: कौन-सी वस्तुओं पर हुआ बदलाव?
सरकार ने सितंबर 2025 में जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। पेंटीहोस, साबुन, दूध पाउडर जैसी रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं पर जीएसटी दर 18% से घटाकर 5% कर दी गई। इसके अलावा, कुछ खाद्य पदार्थों और दवाओं पर भी टैक्स में कमी की गई। उद्देश्य स्पष्ट था – महंगाई को काबू में रखना और आम आदमी को राहत देना। लेकिन, बाजार में यह बदलाव दिखाई क्यों नहीं दे रहा? विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी कम होने के बाद सप्लाई चेन में बदलाव होने में समय लगता है, लेकिन दुकानदारों का रवैया इस प्रक्रिया को और धीमा कर रहा है।
यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता था, खासकर मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए जो रोजाना इन वस्तुओं पर निर्भर हैं। फिर भी, कई शहरों में सर्वे से पता चला कि 70% से अधिक दुकानों पर दाम वही पुराने हैं।
दुकानदारों की मजबूरी: पुराने दाम क्यों नहीं घटा रहे?
दुकानदारों का कहना है कि जीएसटी दर कटौती का लाभ उन्हें तुरंत नहीं मिल रहा। अधिकांश व्यापारियों ने पुराने स्टॉक को पुरानी दर पर खरीदा था, इसलिए नया स्टॉक आने तक वे दाम नहीं घटा सकते। छोटे दुकानदारों का तर्क है कि किराया, मजदूरी और अन्य खर्चों में कोई कमी नहीं आई है। “हमारे पास नया माल आया ही नहीं है, पुराने दाम पर बेचना पड़ रहा है,” दिल्ली के एक किराना दुकानदार ने बताया।
इसके अलावा, कुछ बड़े रिटेलर्स पर आरोप लगे हैं कि वे जीएसटी लाभ को अपनी मार्जिन में मिला रहे हैं। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, सप्लाई चेन में देरी के कारण 2-3 हफ्ते लग जाते हैं, लेकिन कई दुकानदार जानबूझकर देरी कर रहे हैं ताकि लाभ ग्राहकों तक न पहुंचे। यह स्थिति जीएसटी सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है, जहां ट्रैकिंग की कमी है।
ग्राहकों की शिकायतें बढ़ीं: बाजार में क्या हो रहा है?
सोशल मीडिया और उपभोक्ता फोरम पर ग्राहकों की शिकायतों का सिलसिला थम नहीं रहा। “जीएसटी कम हुआ, लेकिन दुकान का बिल वही पुराना,” एक मुंबई की गृहिणी ने ट्वीट किया। कई शहरों जैसे लखनऊ, चेन्नई और कोलकाता में स्थानीय बाजारों में विरोध प्रदर्शन भी हुए। उपभोक्ता संरक्षण संगठनों का कहना है कि यह धोखाधड़ी का मामला है, क्योंकि जीएसटी कानून के तहत दाम घटाने अनिवार्य है।
एक हालिया सर्वे में पाया गया कि 60% ग्राहक अब ऑनलाइन शॉपिंग की ओर रुख कर रहे हैं, जहां दाम पारदर्शी होते हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह विकल्प सीमित है, जिससे गरीब उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा। जीएसटी कम होने के बाद ग्राहकों को राहत न मिलना महंगाई की मार को और गहरा बना रहा है।
सरकार और जीएसटी विभाग की भूमिका: क्या हो रही कार्रवाई?
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने दुकानदारों को चेतावनी जारी की है कि जीएसटी दर कटौती के बाद दाम घटाना अनिवार्य है। उल्लंघन पर जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी गई है। कई राज्यों में विशेष जांच टीम गठित की गई हैं, जो बाजारों का निरीक्षण कर रही हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक दुकानों पर छापेमारी हुई, जहां पुराने दामों पर बिक्री पाई गई।
फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि सख्ती की जरूरत है। डिजिटल बिलिंग सिस्टम को अनिवार्य करके ट्रैकिंग आसान हो सकती है। सरकार ने भी कहा है कि जीएसटी पोर्टल पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग शुरू की जाएगी, ताकि ग्राहकों को तुरंत राहत मिल सके।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह: कैसे पाएं जीएसटी लाभ?
ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि बिल चेक करें और पुराने दाम पर बिक्री होने पर तुरंत शिकायत दर्ज करें। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या ऑनलाइन पोर्टल पर रिपोर्ट करें। साथ ही, कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर जीएसटी कटौती का लाभ तुरंत दिख रहा है, इसलिए वहां से खरीदारी करें।
लंबे समय में, जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। ग्राहक संगठन सुझाव दे रहे हैं कि हर बिल पर जीएसटी ब्रेकअप अनिवार्य हो, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। यदि आप भी इस समस्या का शिकार हैं, तो स्थानीय बाजार अधिकारी से संपर्क करें।