उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज: 2026 में संभावित मार्च-अप्रैल में मतदान
लखनऊ, 4 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के संशोधन और वार्डों के परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, ये चुनाव मार्च-अप्रैल 2026 में होने की संभावना है। यह चुनाव न केवल ग्रामीण क्षेत्रों की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कसौटी साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, में पंचायत चुनाव हमेशा से ही सियासी दलों और नेताओं के लिए अपनी ताकत और लोकप्रियता को परखने का अवसर रहे हैं। इस लेख में हम पंचायत चुनाव की तैयारियों, प्रक्रिया, और संभावित समयसीमा पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
पंचायत चुनाव की महत्ता
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव ग्रामीण शासन की रीढ़ हैं। ये चुनाव ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत (क्षेत्र पंचायत), और जिला पंचायत स्तर पर आयोजित किए जाते हैं। राज्य में लगभग 58,194 ग्राम सभाएं, 826 विकास खंड, और 75 जिला पंचायतें हैं। इनमें ग्राम पंचायतों में 7,31,813 वार्ड, क्षेत्र पंचायतों में 75,855 वार्ड, और जिला पंचायतों में 30,051 वार्ड शामिल हैं। ये आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि पंचायत चुनाव एक विशाल और जटिल प्रक्रिया है, जिसमें लाखों मतदाता और उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं।
पंचायत चुनाव ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों, जैसे मनरेगा, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति, और स्वच्छता योजनाओं के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, ये चुनाव राजनीतिक दलों को ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। हालांकि पंचायत चुनाव आधिकारिक तौर पर गैर-दलीय आधार पर लड़े जाते हैं, लेकिन प्रमुख दल जैसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), और कांग्रेस अपने समर्थित उम्मीदवारों के लिए सक्रिय रूप से प्रचार करते हैं।
तैयारियों का आगाज
राज्य निर्वाचन आयोग ने 18 जुलाई 2024 से मतदाता सूची के संशोधन और वार्डों के आंशिक परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की थी। यह प्रक्रिया ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों, और जिला पंचायतों की जनसंख्या के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट के साथ शुरू हुई। सरकार ने निर्देश दिया था कि अंतिम वार्ड परिसीमन सूची 12 अगस्त 2024 तक पंचायती राज निदेशक को सौंप दी जाए। इस प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों के वार्डों को जनसंख्या के आधार पर पुनर्गठित किया गया, ताकि प्रत्येक वार्ड में मतदाताओं की संख्या संतुलित रहे।
इसके साथ ही, मतदाता सूची के संशोधन का कार्य भी तेजी से चल रहा है। आयोग ने एक व्यापक कार्यक्रम जारी किया है, जिसके तहत:
30 सितंबर से 24 नवंबर 2024: मतदाता सूची की डिजिटल प्रति तैयार की जाएगी।
25 नवंबर से 4 दिसंबर 2024: मतदान केंद्रों की संख्या और मैपिंग का कार्य पूरा होगा।
5 दिसंबर 2024: मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित किया जाएगा।
6 से 12 दिसंबर 2024: दावों और आपत्तियों के लिए समय दिया जाएगा।
13 से 19 दिसंबर 2024: दावों और आपत्तियों का निपटारा होगा।
15 जनवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयुक्त आर.पी. सिंह ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए। इसके लिए आयोग ने ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी शुरू की है। नागरिक 14 अगस्त से 22 सितंबर 2024 तक आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (https://sec.up.nic.in/OnlineVoters/) के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ सकते हैं। इसके बाद, बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) आवेदकों के घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे।
संभावित चुनाव तारीखें
सूत्रों के अनुसार, पंचायत चुनाव मार्च-अप्रैल 2026 में होने की संभावना है। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी तक आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं की है। पिछली बार, 2021 में पंचायत चुनाव कोविड-19 महामारी के कारण देरी से हुए थे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद चुनाव अप्रैल-मई 2021 में चार चरणों में आयोजित किए गए थे, और परिणाम 2 मई 2021 को घोषित किए गए थे। इस बार, आयोग पहले से ही तैयारियों को समय पर पूरा करने के लिए कटिबद्ध है ताकि किसी भी तकनीकी या प्रक्रियात्मक बाधा से बचा जा सके।
2021 के चुनावों में चार चरणों में मतदान हुआ था: 15 अप्रैल, 19 अप्रैल, 26 अप्रैल, और 29 अप्रैल। इस बार भी, विशाल मतदाता संख्या और प्रशासनिक जटिलताओं को देखते हुए, चुनाव कई चरणों में आयोजित किए जा सकते हैं। यह अनुमान है कि मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा, जैसा कि पिछले चुनावों में देखा गया था।
चुनौतियां और विवाद
पंचायत चुनावों की तैयारियां हमेशा से ही चुनौतियों और विवादों से घिरी रही हैं। 2021 में, सीटों के आरक्षण को लेकर विवाद हुआ था। सरकार ने शुरू में 1995 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण नीति लागू की थी, लेकिन एक याचिकाकर्ता, अजय कुमार, ने इसे 2015 के आधार वर्ष के खिलाफ बताते हुए चुनौती दी थी। इसके बाद, उच्च न्यायालय ने सरकार को 2015 की नीति का पालन करने का निर्देश दिया था। इस बार भी, आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर सियासी दलों और उम्मीदवारों के बीच तनाव की संभावना है।
इसके अलावा, कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन भी एक चुनौती हो सकता है। 2021 में, चुनाव के दौरान मास्क पहनना, थर्मल स्कैनिंग, और सामाजिक दूरी जैसे नियमों का कड़ाई से पालन किया गया था। यदि 2026 में भी स्वास्थ्य संबंधी कोई खतरा रहता है, तो आयोग को इन दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होगी।
सियासी महत्व
पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये चुनाव न केवल स्थानीय नेतृत्व को चुनते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि ग्रामीण मतदाताओं का रुझान किस पार्टी की ओर है। 2021 के पंचायत चुनावों में, समाजवादी पार्टी ने 760 वार्ड जीते थे, जबकि भाजपा ने 720 वार्डों पर कब्जा किया था। बसपा ने 381 और कांग्रेस ने 76 वार्ड जीते थे। निर्दलीय और छोटे दलों ने 1,114 वार्डों में जीत हासिल की थी। ये परिणाम दर्शाते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में सपा और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला है।
2026 के पंचायत चुनाव 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले होंगे, इसलिए ये राजनीतिक दलों के लिए एक लिटमस टेस्ट होंगे। खास तौर पर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन और बेरोजगारी जैसे मुद्दे चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, आवारा पशुओं की समस्या, जो 2022 के विधानसभा चुनावों में भी एक बड़ा मुद्दा थी, इस बार भी ग्रामीण मतदाताओं के लिए चिंता का विषय हो सकती है।