“जीएसटी काउंसिल की ऐतिहासिक बैठक: टैक्स स्लैब घटे, रोज़मर्रा की चीज़ें सस्ती, लक्जरी पर 40% कर का धमाका!”
नई दिल्ली, 4 सितंबर 2025: जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक, जो 3 और 4 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित हुई, ने भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे में ऐतिहासिक बदलावों को मंजूरी दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस मैराथन बैठक, जो 10.5 घंटे तक चली, में केंद्र और राज्यों के मंत्रियों ने कई महत्वपूर्ण कर प्रस्तावों पर चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आम आदमी के लिए कर का बोझ कम करना, कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देना और जीएसटी ढांचे को सरल बनाना था। बैठक के परिणामस्वरूप, जीएसटी के मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18%, और 28%) को हटाकर दो स्लैब (5% और 18%) और एक विशेष 40% स्लैब लागू करने का फैसला किया गया, जो 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होगा। इस लेख में हम इस बैठक के प्रमुख परिणामों, समाप्त होने वाले स्लैब्स, और उन वस्तुओं और सेवाओं की विस्तृत जानकारी देंगे जो अब सस्ती होंगी।
जीएसटी स्लैब में बदलाव: चार से दो स्लैब
जीएसटी काउंसिल ने मौजूदा चार स्लैब संरचना को समाप्त कर इसे दो मुख्य स्लैब्स – 5% और 18% – में बदलने का फैसला किया है। इसके अतिरिक्त, ‘सिन’ और लक्जरी वस्तुओं के लिए एक विशेष 40% स्लैब पेश किया गया है। यह बदलाव 22 सितंबर 2025 से लागू होगा, जो नवरात्रि का पहला दिन है। हालांकि, पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, चबाने वाले तंबाकू, और बीड़ी जैसे उत्पादों पर मौजूदा जीएसटी दरें और मुआवजा उपकर तब तक लागू रहेंगे, जब तक मुआवजा उपकर के तहत सभी ऋण और ब्याज दायित्व पूरे नहीं हो जाते।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं, और किसी भी राज्य ने इसका विरोध नहीं किया। हमने स्लैब्स को कम कर केवल दो स्लैब्स रखे हैं और मुआवजा उपकर के मुद्दों को भी संबोधित किया है।” यह कदम जीएसटी ढांचे को सरल बनाने और कर वर्गीकरण से संबंधित विवादों को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
समाप्त होने वाले स्लैब्स
जीएसटी काउंसिल ने 12% और 28% के स्लैब्स को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया है। इससे पहले, ये स्लैब्स विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर लागू थे, जिससे कर संरचना जटिल हो गई थी। अब, 12% स्लैब में शामिल लगभग 99% वस्तुएं 5% स्लैब में स्थानांतरित होंगी, जबकि 28% स्लैब की लगभग 90% वस्तुएं 18% स्लैब में आएंगी। यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए कई वस्तुओं और सेवाओं को सस्ता करेगा।
सस्ती होने वाली वस्तुएं और सेवाएं
जीएसटी दरों में कमी के इस फैसले से कई रोजमर्रा की वस्तुएं और सेवाएं सस्ती होंगी। नीचे उन प्रमुख वस्तुओं और सेवाओं की सूची दी गई है, जिन पर टैक्स दरों में कमी की गई है:
1॰खाद्य और पेय पदार्थ
शून्य दर (0%): अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (UHT) दूध, पनीर, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, और सभी भारतीय ब्रेड जैसे रोटी, चपाती, और पराठा अब पूरी तरह कर-मुक्त होंगे। पहले इन पर 5% जीएसटी लगता था।
5% दर: नमकीन, भुजिया, सॉस, इंस्टेंट नूडल्स, कॉफी, घी, मक्खन, च10% छाछ, कंडेंस्ड मिल्क, ड्राई नट्स, जैम, फ्रूट जेली, टेंडर नारियल पानी, और कॉर्न फ्लेक्स जैसे खाद्य पदार्थों पर जीएसटी 12% या 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
ऑटोमोबाइल
छोटी कारें: 1200 सीसी तक की पेट्रोल, एलपीजी, या सीएनजी कारें और 1500 सीसी तक की डीजल कारें, जिनकी लंबाई 4000 मिमी तक है, अब 28% के बजाय 18% जीएसटी के दायरे में आएंगी।
मोटरसाइकिल: 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलों पर भी जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया है।
ऑटो पार्ट्स: सभी ऑटो पार्ट्स पर अब एक समान 18% जीएसटी लागू होगा, जो पहले 28% था।
एम्बुलेंस: विशेष रूप से एम्बुलेंस के रूप में डिज़ाइन किए गए वाहनों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया है।
स्वास्थ्य और चिकित्सा
जीवन रक्षक दवाएं: 33 जीवन रक्षक दवाओं और दवाइयों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% और 3 कैंसर, दुर्लभ बीमारियों, और गंभीर पुरानी बीमारियों के लिए दवाओं पर 5% से शून्य कर दिया गया है।
चिकित्सा उपकरण: थर्मामीटर, मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन, सभी डायग्नोस्टिक किट और रिएजेंट्स, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स, और सुधारात्मक चश्मों पर जीएसटी 18% या 12% से घटाकर 5% किया गया है।
जीवन और स्वास्थ्य बीमा: व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी को 18% से हटाकर शून्य कर दिया गया है।
कपड़ा और जूते
कपड़े और जूते: 2500 रुपये तक के जूते और कपड़ों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया है। पहले 1000 रुपये तक के उत्पादों पर 5% जीएसटी लागू था।
हस्तशिल्प और टेक्सटाइल्स: सिंथेटिक यार्न, मैन-मेड स्टेपल फाइबर यार्न, कार्पेट, और हस्तशिल्प पर जीएसटी 12% से 5% कर दिया गया है।
घरेलू उपकरण
एयर कंडीशनर, टीवी, और डिशवॉशर: इन पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया है।
सीमेंट: सीमेंट पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया है।
कृषि और पर्यावरण
कृषि उपकरण: ट्रैक्टर, मिट्टी की तैयारी या खेती के लिए कृषि, बागवानी, या वानिकी मशीनरी, कटाई या थ्रेशिंग मशीनरी, और खाद बनाने वाली मशीनों पर जीएसटी 12% से 5% कर दिया गया है।
सोलर कुकर: सोलर कुकर पर जीएसटी 12% से 5% किया गया है।
अन्य वस्तुएं
स्टेशनरी: इरेज़र, नोटबुक, मानचित्र, चार्ट, और एटलस पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% या शून्य कर दिया गया है।
टॉयलेट्रीज़: टूथपाउडर, टूथपेस्ट, शैम्पू, तेल, और साबुन पर जीएसटी 18% या 12% से घटाकर 5% किया गया है।
होटल बुकिंग: 7500 रुपये तक के कमरे की बुकिंग पर जीएसटी 12% से 5% किया गया है।
महंगी होने वाली वस्तुएं
नए 40% स्लैब में ‘सिन’ और लक्जरी वस्तुएं शामिल हैं, जैसे:
पान मसाला, सिगरेट, गुटखा, चबाने वाला तंबाकू, और बीड़ी।
50 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली लक्जरी कारें।
कोल्ड ड्रिंक्स और अन्य हानिकारक उत्पाद।
हालांकि, इन वस्तुओं पर मौजूदा दरें तब तक लागू रहेंगी, जब तक मुआवजा उपकर के दायित्व पूरे नहीं हो जाते।
आर्थिक प्रभाव
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि इस दर राशनलाइजेशन से लगभग 48,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्रभाव पड़ेगा, जो केंद्र और राज्यों के लिए वित्तीय रूप से टिकाऊ है। बैंक ऑफ बड़ौदा के अर्थशास्त्री सोनल बधन के अनुसार, यह सुधार 2025-26 वित्तीय वर्ष में देश की जीडीपी में 0.2-0.3% की वृद्धि कर सकता है।
उद्योग और उपभोक्ता प्रतिक्रिया
उद्योग विशेषज्ञों ने इस सुधार को स्वागत किया है। केपीएमजी के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख अभिषेक जैन ने कहा, “यह कदम उपभोग को बढ़ावा देगा और व्यवसायों को 20 दिनों का समय देगा ताकि वे नए दरों के लिए तैयार हो सकें।” डेयरी उद्योग का मानना है कि दूध और दूध उत्पादों पर जीएसटी में कमी से खपत बढ़ेगी और मिलावट को हतोत्साहित किया जाएगा।
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